ताजमहल किसी परिचय का मोहताज नहीं है| हम सभी जानते हैं कि ताजमहल का निर्माण मुग़ल शहंशाह शाहजहाँ ने अपनी सबसे प्रिय व ख़ूबसूरत बेगम मुमताज महल की याद में करवाया था।
वैसे तो हिन्दुस्तान में कई अद्भुत ऐतिहासिक इमारतें हैं परंतु हम यह दावे के साथ कह सकते हैं कि ताजमहल की सुंदरता का कोई सानी नहीं।
हम ताजमहल के दर्शन पहले भी कर चुके थे, परंतु हमारी बेटी को साथ लेकर जाने का कभी संयोग नहीं बन पाया। जब उसे पता चला कि ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है तो उसकी तीव्र इच्छा थी कि हम वहाँ जाएँ। इस बार जब हमारा छुट्टियों में कार से उत्तर भारत भ्रमण का प्रोग्राम बना तो उसने अपनी यह पुरानी इच्छा फिर से ज़ाहिर की।
इस यात्रा के कार्य्रक्रम के लिए जब हम इंटरनेट सर्च कर रहे थे तो हमें पता चला कि पिछले कुछ सालों से पुरातत्व विभाग ने ताज को पूर्णिमा के आस पास रात्रि दर्शन के लिए खोल दिया है। इस यात्रा को अविस्मरणीय बनाने के लिए हमने अपना आगरा पहुँचने का प्रोग्राम पूर्णिमा को बनाया।
हम बेंगलूर से हैदराबाद , नागपुर, आदिलाबाद ,जबलपुर ,ग्वालियर व ओरछा घूमते हुए २०१७ कि.मी. की यात्रा कर पाँचवे दिन, 20 अप्रैल २०१६ अर्थात पूर्णिमा के पहले दिन आगरा पहुँच गए। हमने अपने प्रोग्राम में आगरा के लिए दो दिन रखे थे। हमें आभास था कि इस अतुल्य सौंदर्य से भरी ऐतिहासिक इमारत की सुंदरता को निहारने के लिए हमें कम से कम इतना समय तो लगेगा ही।
हमने ठहरने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के 'होटल ताज़ खेमा' को बुक करवाया था क्योंकि यह ताजमहल के बहुत ही क़रीब है। कहा जाता है कि ताज की नींव की खुदाई के समय जो मिट्टी निकाली गई वह ताज से कुछ ही दूरी पर डाल दी गई, बाद में में उस मिट्टी ने एक छोटे से टीले का रूप ले लिया और उसी टीले पर आजकल होटल ताज़ा खेमा स्थित है। यहाँ से दिन में भी ताज महल का नज़ारा देखा जा सकता है। हमने भी इसका फ़ायदा उठाते हुए क़रीब चार बजे शाम को दूर से इसका लुत्फ़ लिया यह हमारी बेटी का पहला ताजमहल दर्शन था और वह इस आधे अधूरे ताज को देखकर ही मंत्र मुग्ध हो गई।
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| होटल ताज खेमा से ताजमहल |
सुबह का ताजमहल :
अगली सुबह हम ५ बजे उठ गए ताकि ताज की सुंदरता को सुबह की धूप में निहार पाएं| ताजमहल पर्यटकों के लिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक खुल रहता है किन्तु टिकट खिड़की सूर्योदय से आधा घंटा पहले खुल जाती है| हम ५:४५ बजे होटल से टिकट खिड़की की ओर निकल गए जो की होटल के समीप ही स्थित है|
टिकट लेने और सुरक्षा जांच की औपचारिकताओं के बाद हम ६:३० बजे ताज के मुख्य द्वार पर पहुँच गए| सुबह की धूप में नहाया हुआ ताज सचमुच किसी अजूबे से काम नहीं था | यह नज़ारा बहुत ही अद्भुत था, जिस भी तरफ से ताज को देखा वह एक अलग कहानी कह रहा था|
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| ताजमहल एक अलग रूप में |
ताज को देखते देखते हमें समय का एहसास ही नहीं हुआ और ३ घंटे न जाने कैसे बीत गए| इस बीच हमारे गाइड ने हमें ताज की रोचक कहानी बताते हुए अतीत के पन्नों में पहुंचा दिया|
ताज रात्रि दर्शन :
सबसे पहले कुछ जानकारी ताज रात्रि दर्शन पर :
रात्रि दर्शन के टिकट आपको पहले से लेने होते है। सामान्यतः जिस होटल में आप ठहरते हैं वह आपके लिए टिकट कुछ मामूली फीस ले कर टिकट मंगवा देते हैं। हमारे लिए 'ताज खेमा' के लोगों ने टिकट ख़रीद दिए थे। टिकट के लिए आपके कोई एक पहचान पत्र की ज़रूरत होती है।
मोबाइल फ़ोन, कैमरा स्टैंड, खाने पीने का सामान, कोई भी इलेक्ट्रॉनिक वस्तु जैसे कि कार की रिमोट कंट्रोल चाबी, वीडियो कैमरा इत्यादि ले जाने की इजाजत नहीं है, सिर्फ स्टिल कैमरा ले जाने की छूट है|
रात्रि दर्शन के लिए ताज के पूर्वी द्वार पर स्थित शिल्पग्राम पहुँचना होता है जहाँ आपकी प्रारंभिक सुरक्षा जांच होती है | आपको ३ सुरक्षा द्वारों के गुजरना पड़ता है और हर द्वार पर मुफ्त लाकर्स की सुविधा उपलब्ध है|
सुरक्षा कर्मी ५० के दल में आपको अपने वाहनों से मुख्य द्वार तक ले जाते हैं। रात्रि को ताज के दर्शन सिर्फ़ मुख्य द्वार के लाल पत्थर के चबूतरे से ही कर सकते है।सुरक्षा कारणों से इससे आगे जाने की अनुमति नहीं है।
हम इन सब प्रतिबंधों से परिचत थे लेकिन कैमरा स्टैंड के बिना इतनी दूर से रात को ताज की तस्वीर लेना असम्भव था, इसको हल करने के लिए हमने एक ऊनी शाल का सहारा लिया जो कि एक लचीला और भरोसेमंद आधार के रूप में काम आया|
ठीक १०:३० बजे हमारा ग्रुप ताज के मुख्य द्वार से अंदर पहुंचा| यह स्थान ताज से करीब १५० मीटर दूर है और ताज के आस पास कोई भी लाइट स्रोत नहीं है, और तो और, दर्शन चबूतरे की लाइट्स भी ५ मिनट बाद बंद कर दी जाती हैं| अब आप और ताज के बीच में कोई नहीं है सिर्फ चांदनी रात और एक अविस्मरणीय नज़ारा | ताज को निहारते सहसा हमें यह ग़ज़ल याद आ गयी:
चिराग-ओ-आफताब ग़ुम,
बड़ी हसीन रात थी..
सवाल ग़ुम, जवाब ग़ुम,
बड़ी हसीन रात थी..
शबाब की नक़ाब ग़ुम,
बड़ी हसीन रात थी................
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| पूर्णिमा की रात में ताज की एक झलक |
ताज की यात्रा के अनुभव को हूबहू शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है,फिर भी आप तक वह अद्भुत अनुभव पहुंचाने का यह हमारा एक छोटा सा प्रयास है|
हमारी उत्तर भारत की रोड यात्रा के और झलकियों के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें.
@ आइवरी पिक्सेल फोटोग्राफी
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